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कानून मंत्री रिजिजू बोले- Supreme Court Collegium Alien, CJI चंद्रचूड़ ने कहा- कोई भी संस्था परफेक्ट नहीं

 नई दिल्ली  

Minister Rijiju की नजरों में Alien यानी लीक से अलग हटकर है। जजों की नियुक्ति की प्रणाली कॉलेजियम पर कमेंट के बीच Chief Justice Chandrachud ने कहा है कि लोकतंत्र में कोई भी संस्था परफेक्ट नहीं है, ऐसे में केवल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को प्वाइंट आउट करना ठीक बात नहीं। बता दें कि सीनियर जजों के पैनल को कॉलेजियम कहा जाता है, जिसकी सिफारिश पर जजों की नियुक्ति होती है। कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कॉलेजियम सिस्टम को संविधान से अलग (Alien) करार दिया। उन्होंने कहा कि संविधान सभी के लिए एक "धार्मिक दस्तावेज" है, खासकर सरकार के लिए। हालांकि, जजों की नियुक्ति की प्रणाली- कॉलेजियम पर कानून मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणी नए विवाद को जन्म दे सकती है। 31 साल पहले सरकारें बनाती थीं जज ! शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के तंत्र पर एक 'हमला' करते हुए कानून मंत्री ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली संविधान के लिए "विदेशी" है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने विवेक से, एक अदालत के फैसले के माध्यम से कॉलेजियम बनाया, जबकि 1991 से पहले सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती थी। 

कॉलेजियम पर कानून मंत्री की टिप्पणी पर एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक रिजिजू ने टाइम्स नाउ समिट में कहा कि भारत का संविधान सभी के लिए, विशेष रूप से सरकार के लिए एक "धार्मिक दस्तावेज" है। उन्होंने कहा, कोई भी चीज जो केवल अदालतों या कुछ न्यायाधीशों द्वारा लिए गए फैसले के कारण संविधान से अलग (Alien) है, ऐसे में आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि इसके निर्णय का पूरा देश समर्थन करेगा ? Recommended Video कौन था मुल्ला-दो-प्याजा जो अकबर का नवरत्न बना और प्याज से क्या कनेक्शन था? सरकार को मेहनत करनी पड़ती है रिजिजू ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली हमारे संविधान से अलग है। उन्होंने सवाल किया, "आप मुझे बताएं कि कॉलेजियम प्रणाली किस प्रावधान के तहत निर्धारित की गई है।" कानून मंत्री रिजिजू ने स्पष्ट किया कि एक बार जब उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय का कॉलेजियम सिफारिश भेज देता है, तो सरकार को उचित परिश्रम (due diligence) करना पड़ता है।

 जब तक बेहतर सिस्टम नहीं, कॉलजियम… गौरतलब है कि अदालतों में लंबित मामलों की तुलना में जजों की संख्या और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की विभिन्न सिफारिशों पर फैसलों में देरी और जजों की नियुक्ति में सरकार पर लगने वाले 'मौन' रहने के आरोपों पर एक सवाल का जवाब देते हुए रिजिजू ने कहा कि 1991 में तत्कालीन सरकार ने भी कॉलेजियम का सम्मान किया। वर्तमान शासन भी "कॉलेजियम प्रणाली का बहुत सम्मान करती है, जब तक जजों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम से बेहतर प्रणाली प्रतिस्थापित नहीं की जाती।" संसद से पारित NJAC सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराया कानून मंत्री ने साफ किया कि वह इस बहस में नहीं पड़ेंगे कि यह व्यवस्था कैसी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "इसके लिए एक बेहतर मंच या बेहतर स्थिति की आवश्यकता है।" संसद ने कॉलेजियम प्रणाली के बदले राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) लगभग सर्वसम्मति से पारित किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया। कॉलेजियम का सम्मान करना पड़ेगा रिजिजू ने कहा कि जब तक कॉलेजियम प्रणाली प्रचलित है, उन्हें प्रणाली का सम्मान करना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि अगर आप उम्मीद करते हैं कि उन्हें केवल न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने वाले नाम पर हस्ताक्षर करना चाहिए क्योंकि यह कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित है, तो सरकार की भूमिका क्या है ? उचित परिश्रम (due diligence) शब्द का क्या अर्थ है ? सरकारों के पास फाइलें क्यों भेजते हैं ? उन्होंने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली में खामियां हैं और "लोग आवाज उठा रहे हैं कि प्रणाली पारदर्शी नहीं है।

 इसके अलावा, कोई जवाबदेही भी नहीं है। कानून मंत्री ने जजों की नियुक्ति में देरी के आरोपों पर कहा कि किसी को यह नहीं कहना चाहिए कि सरकार फाइलों पर मौन बैठी है। बकौल रिजिजू, "फिर फाइलें सरकार को मत भेजें। आप खुद को नियुक्त करते हैं और आप शो चलाते हैं … सिस्टम काम नहीं करता है। कार्यपालिका और न्यायपालिका को मिलकर काम करना होगा।" हर जज सही नहीं, लेकिन… कॉलेजियम प्रणाली को संविधान से अलग बताने से पहले रिजिजू ने कहा कि हर जज सही नहीं होता। उन्होंने कहा, "लेकिन हर फैसला दोष रहित और ठीक (correct and right) है क्योंकि यह एक न्यायिक फैसला है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कोई भी न्यायपालिका का अपमान नहीं कर सकता है और कोई भी अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकता है।"

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